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अयोध्या : राम जन्मभूमि में समतलीकरण के दौरान मिले मंदिर के अवशेष

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अयोध्या। राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए लॉकडाउन का पालन करते हुए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गर्भगृह में समतलीकरण करा रहा है। राम जन्मभूमि में समतलीकरण के दौरान मंदिर के अवशेष मिले हैं। जेसीबी से हो रही खुदाई में मंदिर के आमलक मूर्ति युक्त पाषाण के खंभे, प्राचीन कुंआ मंदिर के चौखट है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव एवं विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के उपाध्यक्ष चंपत राय ने बताया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के द्वारा जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करने के उपरांत श्रीराम जन्मभूमि परिसर में भावी मंदिर निर्माण के लिए भूमि के समतलीकरण एवं पुराने गैंगवे को हटाने का कार्य प्रारंभ किया गया। उन्होंने बताया कि इस कार्य में तीन जेसीबी मशीन, एक क्रेन, दो ट्रैक्टर व 10 मजदूर लगे हुए हैं। कोरोना के कारण कार्य मंद गति में चल रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए हाईकोर्ट के आदेशों के क्रम में पूर्व में हुई खुदाई प्राप्त पुरावशेषों के अतिरिक्त 11 मई से प्रारंभ समतलीकरण के दौरान काफी संख्या में पुरावशेष देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प, कलश, आमलक, दोरजाम्ब आदि कलाकृतियां, मेहराब के पत्थर, 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ, छह रेड सैण्ड स्टोन के स्तंभ, 5 फिट आकार की नक्काशी युक्त शिवलिंग की आकृति आज तक प्राप्त हुई है। समतलीकरण का कार्य भी प्रगति पर है। कोरोना महामारी के संबंध में समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करते हुए मशीनों का उपयोग एवं व्यक्तिगत दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) सैनेटाइजेशन,मास्क आदि अन्य सभी सुरक्षा उपायों का प्रयोग किया गया।
चंपत राय ने भ्रांतियां से हटाया परदा
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के उपाध्यक्ष चंपत राय ने बुधवार को विश्व हिंदू परिषद के फेसबुक पेज पर बताया कि भगवान की जन्मभूमि को बदला नहीं जा सकता, इसलिए अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर नहीं, बल्कि रामजन्मभूमि का मंदिर बनने जा रहा है। एक विदेशी आक्रांता ने हम पर हमला किया, जिससे हमारा अपमान हुआ है और अब अयोध्या में मंदिर बन जाएगा लेकिन अपमान अभी बाकी है। इस अपमान का परिमार्जन भी बहुत महत्वपूर्ण बात है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्म स्थल पर कोई नया मंदिर का निर्माण नहीं किया जा रहा है बल्कि पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है। अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण देश के स्वाभिमान का पुनर्निर्माण है।
उन्होंने बताया कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रामजन्मभूमि परिसर में ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए समतलीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए ट्रस्ट के महासचिव समेत कई सदस्यों ने परिसर में डेरा डाल दिया है। इस दौरान ट्रस्ट पूरी तरह मीडिया से दूरी बनाई हुई है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में रामकोट नाम का एक मोहल्ला है, जिससे कोट किले कहा जाता है, वर्षों पहले कोई बहुत बड़ा किला रहा होगा। इस क्षेत्र में दर्जनों मंदिर हैं जिसमें दशरथ महल, सीता भवन, कोपभवन, कोहबर भवन, सीता रसोई नाम से मंदिर है। जो कि सभी भगवान श्रीराम के जीवन काल से जुड़े हैं। राम जन्मभूमि के ट्रस्ट गठन इन सबके बीच 0.3 एकड़ की एक भूमि हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है। इसमें सरकार को ट्रस्ट बनाने का निर्देश हुआ और पांच फरवरी,2020 को सरकार ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। सरकार ने अपने ट्रेजरी से एक रुपये का पहला डोनेशन ट्रस्ट को दिया। ट्रस्ट के गठन के बाद कार्य काफी आगे तक किया जा चुका है।

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