Thu. Dec 12th, 2019

Lohia Kranti

The Best News

भक्तों को आश्चर्य चकित करता है पत्थर पर स्वयं उभरा मां भगवती का आकार

1 min read

( के.के.मिश्रा)

सुलतानपुर । मुख्यालय से ५ कि०मी० की दूरी पर स्थित लोहरामऊ देवी का बना भव्य एवं विशाल मंदिर श्रद्धा एवं आस्था का केन्द्र है। लोहिया कान्ती के संवाददाता ने जब मंदिर के पुजारी एवं क्षेत्र के बुजुर्ग लोगो से बात की तो मंदिर के विषय मे कई आश्चर्य चकित कर देने वाले तथ्य सामने आये। मां भगवती लोहरामऊ देवी का मंदिर सहस्त्रो वर्ष पुराना है । मां भगवती का प्रादुर्भाव स्वयं हुआ है जिनके सम्मुख एक दूसरी प्रतिमा स्थापित व सुसज्जित है इस स्थान पर पुराने जमाने से ही सावन महीने मे नागपंचमी और रक्षा बंधन के बीच पड़ने वाले शुक्रवार एंव सोमवार को अपार भीड़ होती रही है।  इस मंदिर पर सन् १९७८ में पुजारी के तौर पर लोहरामऊ निवासी पं० सरयू प्रसाद मिश्र आये । इसके उपरान्त इन्होने सन् १९८३ में गर्भगृह मंदिर के जीर्णोद्धार की बात सोची जिसके सहायक पं० लालता प्रसाद तिवारी धर्मदासपुर बने तत्पश्चात अप्रैल १९८३ में गर्भ गृह मंदिर का जीर्णोद्धार सम्पन्न हुआ । वयोवृद्ध द्वय ने जनपद के उस दौरान रहे अपर जिलाधिकारी पं० रमाकान्त द्विवेदी को उत्सव में आमंत्रित किया  जिसमें उन्होने जौनपुर वाराणसी राजमार्ग से निकले मंदिर के रास्ते को पिच कराया। 
उत्साह बढ़ा विशाल बने गुम्बद व पूरे मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए दोनो बुजुर्गो ने कमर कस ली। सन् १९९१ मे स्वामी पीताम्बरदेव जी महराज हडिया बाबा के कर कमलो द्वारा जीर्णोद्धार का शिलान्यास किया गया  इसके बाद भक्तो की जागृति व सहयोग से मंदिर को एक विशाल रहृप दिया गया  जो प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है । विदित रहे कि इस मां भगवती के पुराने मंदिर के तोड़-फोड़ में ऐसी वास्तुकला पायी गयी । जिसमे एक इंच भी लोहा नही लगा हुआ हुआ था और ईटे भी लगभग १० किलो वजन के पाई गई तथा यज्ञ इत्यादि करने के लिए यज्ञ शाला की आवश्यकता थी।  इसी बीच इस इच्छा को लिए पं० लालता प्रसाद तिवारी बीमारी के कारण विस्तर पर पडे रहे और पुजारी सरयू प्रसाद मिश्र को बुलाया और कहा कि लगता है कि यह कार्य अधूरा रह जायेगा पुजारी ने आश्श्वासन दिया इसी बीच पं० लालता प्रसाद का देहावसान हो गया जिसके पश्चात सन् १९९८ में ६०० वर्ग फीट की यज्ञ शाला का निर्माण हुआ। तदोपरान्त मंदिर में गर्भगृह में एक भक्त ने मार्वल पत्थर लगाने को सोचा मार्वल पत्थर की सफाई के दौरान पुरानी मूर्रि्त के शीर्ष पर मार्बल पत्थर मे ही मां भगवती की कृपा से उनका आकार स्वंय बन गया जिसमें विषय में स्थानीय टी०वी० चैनलो व न्यूज ने सन् २००१-०२ मे चित्र सहित प्रसारित किया था।  लोगो ने आशंका जाहिर किया कि यह बनवाया गया है बिहारी कारीगर सुरेन्द्र यादव से भी लोगो ने पूछा कि कही पुजारी ने तो नही बनवाया जिस पर उस कारीगर ने लोगो को बताया कि न ही बनवाया गया है और न मैने ही बनाया है यह मां भगवती की मात्र कृपा ही है यह वर्तमान चमत्कार जगत जननी के स्वंय सिद्ध स्थान और प्रभाव शाली बताता है। ठीक इसी तरह पुजारी के बैठने के स्थान पर चार चार चैको के संयोग से बनी हुई फर्श पर मृग चर्म का निशान आज भी दृष्टब्य है। इसी बीच मंदिर के पुजारी रहे पं० सरयू प्रसाद मिश्र का देहावसान हो गया जिसके बाद उनके साथ रह रहे उनके पुत्र पं० राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने मंदिर को दायित्व संभाला। मजे की बात तो यह है कि इस परिवार को मां की पूजा अर्चना करने का दायित्व पीढी दर पीढी चला आ रहा है कभी इस मंदिर के पुजारी सरयू प्रसाद मिश्र इनके पूर्व  श्री सरयू प्रसाद मिश्र के मामा राज बहादुर तिवारी ४० वर्ष तक इस मंदिर के पुजारी रह चुके है। उधर मौजूदा समय मे रह रहे मंदिर के पुजारी पं० राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने बताया कि २६-२७ वर्ष की अवधि मे इस स्थल से तमाम तरह के चमत्कार होते रहे है जिनका उल्लेख करना सामान्य लोगो की दृष्टि में हास्यास्पद समझा जायेगा। इसके लिए सिर्फ मां भगवती की कृपा मान लेना ही श्रेयस्कर होगा। इसी के साथ मंदि के मुख्य द्वार पर स्थित कुंए के बारे में तमाम तरह की लोगो मे क्विदंतियां है कि लोहरामउहृ गांव उस दौरान किसी राजा के अधीन नही था तत्कालीन भदैयां नरेश रुस्तम सिंह ने रात्रि मे लोहरामउहृ गावं पर धावा बोला। मां भगवती ने गांव वासियो को स्वप्न मे इसकी जानकारी दी। लोग विहवलता से उठे और बात को सत्य पाया लोगो ने देखा कि एक स्त्री लडते हुए आगे आगे जा रही है उस दौरान अचानक एक बवंडर सा आया और रुस्तम सिंह का सिर धड से अलग हो गया। स्स्त्रत विलुप्त हो गयी। तब इस बात से दुखी होकर भदैयां की रान नाराज हो गयी और निश्श्च्य किया कि इस गांव मे कही पानी नही ग्रहण करुंगी इसके उपरांत भदैयां रानी मां देवी की शरण मे आयी और एक कुंएं का निर्माण करवाया लौकिक तौर पर रानी भदैयां ने यहां के लोगो से बैर माना और मंदिर के सम्मुख एक कूप का निर्माण करवाया जहां पर आकर वह अपने ही बनवाए हुए कुएं से जल को ग्रहण करती थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

October 2019
M T W T F S S
« Sep   Nov »
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
28293031